Sunday, December 21, 2025

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, डेरा : स्वच्छता कार्यक्रम

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, डेरा : स्वच्छता कार्यक्रम

 भारत सरकार की स्वच्छ भारत मिशन के तहत चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों में 'स्वच्छता ही सेवा' एक महत्वपूर्ण पहल है, जो न केवल सफाई की आदतों को बढ़ावा देती है, बल्कि सामुदायिक भागीदारी को भी प्रोत्साहित करती है। इसी कड़ी में राजस्थान सरकार की पहल पर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा ने हाल ही में एक उत्साहपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्थानीय समुदाय के सदस्यों ने मिलकर स्वच्छता के महत्व को रेखांकित किया। यह आयोजन न केवल विद्यालय परिसर को चमकदार बनाने का माध्यम बना, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य जागरूकता के संदेश को भी फैलाया।


राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा, जो राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्र में स्थित है, लंबे समय से शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी के कार्यों में सक्रिय रहा है। लेकिन इस वर्ष विद्यालय ने इसे स्थानीय स्तर पर विस्तारित करते हुए दिसंबर माह में एक विशेष आयोजन किया। इसका उद्देश्य सर्दियों के मौसम में बढ़ते प्रदूषण और कचरे के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करना था। विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री रोहिताश कुमार ओसवाल ने बताया कि यह स्वच्छता कार्यक्रम राजस्थान सरकार के 2 वर्ष पूर्ण होने पर TWO YEARS OF GOVERNANCE से प्रेरित है |



कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 10.30 बजे विद्यालय परिसर में एक सभा से हुई, जहां प्रधानाचार्य ने स्वच्छता के महत्व पर भाषण दिया। उन्होंने कहा, "स्वच्छता केवल सफाई नहीं, बल्कि एक जीवनशैली है जो हमें स्वस्थ और समृद्ध बनाती है।" इसके बाद, विद्यार्थियों को विभिन्न समूहों में विभाजित किया गया |

सफाई अभियान (क्लीनअप ड्राइव): लगभग 200 विद्यार्थियों और 20 शिक्षकों ने विद्यालय के कक्षाओं, खेल मैदान, पुस्तकालय और आसपास के क्षेत्र को साफ किया। प्लास्टिक कचरा, पत्तियां और अन्य अपशिष्ट को अलग-अलग एकत्रित किया गया। विशेष रूप से, विद्यालय के पीछे की नाली और बगीचे को साफ करने पर जोर दिया गया, जहां से करीब 40 किलोग्राम कचरा निकाला गया। इस दौरान, रिसाइक्लिंग की अवधारणा पर जोर देते हुए, विद्यार्थियों को बताया गया कि कैसे प्लास्टिक को दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है।



स्वच्छता कार्यक्रम का आयोजन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ, जो दर्शाता है कि छोटे स्तर पर शुरू किए गए प्रयास बड़े बदलाव ला सकते हैं। यह कार्यक्रम हमें याद दिलाता है कि स्वच्छता व्यक्तिगत जिम्मेदारी है, जो सामूहिक प्रयासों से ही साकार होती है। भविष्य में, ऐसे अभियानों को और अधिक समावेशी बनाने के लिए डिजिटल टूल्स का उपयोग किया जा सकता है, जैसे ऐप्स के माध्यम से कचरा ट्रैकिंग।

अंत में, यदि हम सभी मिलकर स्वच्छता को अपनाएं, तो एक स्वस्थ और सुंदर भारत का सपना साकार हो सकता है।

जय हिंद!

पर्यावरण जागरूकता पर प्रभात फेरी

 

पर्यावरण जागरूकता: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा के विद्यार्थियों द्वारा प्रभात फेरी का आयोजन

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा के विद्यार्थियों ने पर्यावरण जागरूकता पर केंद्रित एक भव्य प्रभात फेरी का आयोजन किया। यह कार्यक्रम राजस्थान सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने न केवल पर्यावरण की रक्षा का संदेश दिया, बल्कि स्थानीय समुदाय को भी जागरूक करने का प्रयास किया। जहां युवा पीढ़ी पर्यावरणीय मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभा रही है।



प्रभात फेरी का आयोजन सुबह के समय किया गया, जिसमें विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। हाथों में तिरंगा और बैनर लिए, नारे लगाते हुए उन्होंने गांव की गलियों से गुजरकर आम जनता को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। नारे जैसे "पेड़ लगाओ, धरती बचाओ", "प्लास्टिक को कहो ना", "स्वच्छ भारत, हरित भारत" आदि गूंजते रहे। इस फेरी में विद्यार्थियों ने पौधारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त जीवन और स्वच्छता जैसे मुद्दों पर लोगों को जागरूक किया।


यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना जगाता है, बल्कि समाज को भी प्रेरित करता है। स्कूल के प्रधानाचार्य और शिक्षकों के मार्गदर्शन में हुई इस पहल से स्पष्ट है कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सरोकारों से जुड़ी होनी चाहिए। ऐसे कार्यक्रमों से युवा पर्यावरण योद्धा बनकर उभरते हैं, जो भविष्य में बड़े बदलाव ला सकते हैं।

यह प्रभात फेरी न केवल एक आयोजन था, बल्कि एक संदेश था कि पर्यावरण संरक्षण सबकी साझा जिम्मेदारी है। विद्यालय के प्रधानाचार्य ने कहा कि भविष्य में ऐसे और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जैसे वन संरक्षण क्लब की गतिविधियां और जागरूकता वर्कशॉप। सरकार के 'मिशन लाइफ' और अन्य पर्यावरण अभियानों से जुड़कर विद्यालय आगे भी योगदान देगा।


Friday, October 31, 2025

भगवान बिरसा मुंडा पर पत्र लेखन और चित्र प्रतियोगिता

 

भगवान बिरसा मुंडा पर पत्र लेखन और चित्र प्रतियोगिता: एक प्रेरणादायक आयोजन

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, डेरा (रैणी) अलवर

दिनांक: 31 अक्टूबर 2025

नमस्कार ! राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा में हमेशा छात्रों के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षिक आयोजन किए जाते हैं। हाल ही में, हमने एक विशेष प्रतियोगिता का आयोजन किया जो न केवल छात्रों की रचनात्मकता को निखारने वाला था, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महान आदिवासी नायक, बिरसा मुंडा की स्मृति को भी जीवंत करने वाला था। यह आयोजन था – भगवान बिरसा मुंडा पर पत्र लेखन और चित्र प्रतियोगिता। इस ब्लॉग में हम इस आयोजन की झलक साझा करेंगे, ताकि आप भी इस प्रेरणा से जुड़ सकें।

बिरसा मुंडा: धरती आबा, आदिवासियों के मसीहा

पहले थोड़ा पीछे चलते हैं। बिरसा मुंडा (15 नवंबर 1875 – 9 जून 1900) एक भारतीय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और मुंडा जनजाति के लोक नायक थे। झारखंड के खूंटी जिले में एक गरीब किसान परिवार में जन्मे बिरसा ने ब्रिटिश राज के खिलाफ आदिवासियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। अंग्रेजों की कुटिल नीतियों ने आदिवासियों को उनकी जल-जंगल-जमीन से वंचित कर दिया था। बिरसा ने 'उलगुलान' (क्रांति) आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसमें उन्होंने आदिवासियों को एकजुट कर जमींदारों और मिशनरियों के शोषण के विरुद्ध आवाज उठाई।

वे केवल एक योद्धा ही नहीं थे, बल्कि एक धार्मिक सुधारक भी थे। उन्होंने 'बिरसैत' धर्म की स्थापना की, जो आदिवासी परंपराओं को पुनर्जीवित करता था। मात्र 25 वर्ष की आयु में रांची जेल में हैजा से उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी विरासत आज भी जीवित है। भारत सरकार ने उनकी जयंती 15 नवंबर को 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में घोषित किया है। बिरसा को आदिवासी 'धरती आबा' (पृथ्वी के पिता) कहते हैं, और उनका योगदान स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अमर है।

ऐसे महान व्यक्तित्व को याद करने के लिए ही हमने यह प्रतियोगिता आयोजित की।

आयोजन का विवरण: छात्रों की रचनात्मकता का उत्सव

विद्यालय के सभागार में 31 अक्टूबर 2025 को यह प्रतियोगिता आयोजित की गई। कक्षा 8वीं से 12वीं तक के लगभग 110 छात्रों ने इसमें भाग लिया। आयोजन दो भागों में विभाजित था:

  1. पत्र लेखन प्रतियोगिता: छात्रों को बिरसा मुंडा को एक काल्पनिक पत्र लिखना था, जिसमें उनके संघर्ष, प्रेरणा और आज के युवाओं के लिए संदेश पर फोकस करना था। विषय था – "प्रिय धरती आबा बिरसा मुंडा, आपके संघर्ष से मुझे क्या सीख मिली।" छात्रों ने भावुक और विचारोत्तेजक पत्र लिखे। उदाहरण के लिए, कक्षा 10 की छात्रा रिया ने अपने पत्र में लिखा, "आपके उलगुलान ने हमें सिखाया कि अन्याय के खिलाफ चुप न रहें। आज पर्यावरण संरक्षण के लिए भी हमें आपकी तरह लड़ना होगा।" यह प्रतियोगिता छात्रों की लेखन शैली, भाषा और भावनाओं को परखने का शानदार माध्यम बनी।
  2. चित्र प्रतियोगिता: यहां छात्रों को बिरसा मुंडा के जीवन के किसी प्रसंग पर चित्र बनाना था, जैसे उनका जन्म, उलगुलान आंदोलन या जेल में शहादत। रंगों और ब्रश के माध्यम से उन्होंने बिरसा की वीरता को जीवंत किया। कक्षा 11 के छात्र विक्रम का चित्र, जिसमें बिरसा जंगल में आदिवासियों को एकजुट करते दिखे, सबसे प्रभावशाली रहा। चित्रों में आदिवासी संस्कृति के तत्व जैसे तीर-कमान, जंगल और ब्रिटिश सिपाहियों का चित्रण बेहद जीवंत था।






आयोजन के दौरान, प्रधानाचार्य श्री छोटेलाल मीना ने उद्घाटन किया और बिरसा मुंडा के जीवन पर एक प्रेरक व्याख्यान दिया। यह दो घंटे का आयोजन छात्रों के लिए एक यादगार अनुभव साबित हुआ।







ये प्रतिभागी न केवल अपनी कक्षा के गौरवान्वित बने, बल्कि पूरे विद्यालय के लिए प्रेरणा बने। इस आयोजन से छात्रों में इतिहास के प्रति रुचि बढ़ी और वे आदिवासी संस्कृति के महत्व को समझने लगे। कई छात्रों ने कहा कि बिरसा मुंडा की कहानी सुनकर वे पर्यावरण और सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय होंगे।

निष्कर्ष: प्रेरणा का स्रोत बने रहें

यह प्रतियोगिता केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बिरसा मुंडा की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास था। उनके शब्दों में, "अबूया राज एते जाना" (अब हमारा राज शुरू हो गया) – आज भी हमें यह सिखाते हैं कि संघर्ष से ही न्याय मिलता है। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा आने वाले समय में ऐसे और आयोजन करता रहेगा।

आप भी अपने विचार साझा करें! क्या आप बिरसा मुंडा के बारे में कुछ जानते हैं? कमेंट में बताएं। अधिक जानकारी के लिए विद्यालय की वेबसाइट पर जाएं या संपर्क करें।

जय हिंद! जय बिरसा!

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा

31 October "MEGA PTM"

 

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, डेरा में मेगा पीटीएम: अभिभावक-शिक्षक संवाद का उत्सव


नमस्कार, शिक्षा का मंदिर हमेशा से ही समाज का दर्पण रहा है, जहां न केवल किताबी ज्ञान का आदान-प्रदान होता है, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अभिभावकों और शिक्षकों का सहयोग भी अपरिहार्य है। आज, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा (रैणी) अलवर में आयोजित मेगा पीटीएम (अभिभावक-शिक्षक बैठक) ने एक बार फिर इस संदेश को मजबूती से दोहराया। यह आयोजन न केवल एक बैठक थी, बल्कि एक उत्सव की तरह था, जहां कई अभिभावक, शिक्षक और छात्र एक मंच पर आए और बच्चों के भविष्य को नई दिशा देने का संकल्प लिया। आइए, इस प्रेरणादायक घटना की झलक देखें।




आयोजन का परिचय: एक नई पहल की शुरुआत

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा, जो राजस्थान के एक शांतिपूर्ण ग्रामीण इलाके में स्थित है, हमेशा से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए जाना जाता रहा है। यहां के समर्पित शिक्षक दल और सक्रिय छात्र समुदाय ने मिलकर इस मेगा पीटीएम को भव्य रूप दिया। आयोजन सुबह 10 बजे से शुरू होकर दोपहर 2 बजे तक चला, जिसके मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सरपंच श्रीमान रामस्वरूप शर्मा ने शिरकत की, जिन्होंने कहा, "यह पीटीएम केवल रिपोर्ट कार्ड बांटने का माध्यम नहीं है, बल्कि अभिभावकों को उनके बच्चे की ताकत और कमजोरियों से जोड़ने का पुल है।"



इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य था:

  • छात्रों की प्रगति पर चर्चा: प्रत्येक कक्षा के शिक्षकों ने अभिभावकों को बच्चों की शैक्षणिक, खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में प्रदर्शन की विस्तृत जानकारी दी।

  • सामंजस्य स्थापित करना: अभिभावक और शिक्षक एक-दूसरे के विचारों को साझा कर सके, ताकि घर-स्कूल के बीच का संवाद मजबूत हो।

  • रिपोर्ट कार्ड वितरण: 100 से अधिक छात्रों के रिपोर्ट कार्ड अभिभावकों के हाथों सौंपे गए। विज्ञान, गणित और हिंदी जैसे विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को विशेष पुरस्कार दिए गए। एक मां ने साझा किया, "मेरा बेटा कक्षा 10वीं में है। आज पहली बार मुझे पता चला कि वह न केवल पढ़ाई में अच्छा है, बल्कि खेल में भी अगुवाई करता है। यह जानकारी मेरे लिए सोने जैसी है।"

  • पोस्टर पतियोगिता कार्यक्रम: छात्रों ने पोस्टर प्रतियोगिता के माध्यम से  'शिक्षा का महत्व' को भी प्रस्तुत किया गया |

  • अभिभावकों की प्रतिक्रिया: आयोजन के दौरान साक्षात्कार लेने पर अधिकांश अभिभावकों ने इसे 'आंखें खोलने वाला' बताया। एक पिता बोले, "पहले हम सोचते थे कि स्कूल सिर्फ पढ़ाने का स्थान है, लेकिन आज पता चला कि यहां बच्चों का चरित्र निर्माण भी हो रहा है।"



महत्व :

राजस्थान सरकार की 'शिक्षित राजस्थान, विकसित राजस्थान' पहल के तहत ऐसे आयोजन नियमित रूप से हो रहे हैं। यह पीटीएम न केवल छात्रों की शैक्षणिक प्रगति पर नजर रखता है, बल्कि सामाजिक एकता को भी मजबूत करता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां अभिभावक अक्सर व्यस्त रहते हैं, ऐसे कार्यक्रम उन्हें स्कूल से जोड़ते हैं।

यह आयोजन हमें याद दिलाता है कि शिक्षा एक सामूहिक जिम्मेदारी है। अभिभावक घर पर, शिक्षक स्कूल में और सरकार नीतियों से – सभी मिलकर ही राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।

कृष्ण भोज

    राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, डेरा द्वारा आज, 31 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में कृष्ण भोज का आयोजन किया गया, जो भारतीय संस्कृति और एकता की भावना को दर्शाने वाला एक अनूठा प्रयास प्रतीत होता है। यह आयोजन सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक विविधता को मजबूत करने के उद्देश्य से जुड़ा हुआ लगता है।



समापन :

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा का यह मेगा पीटीएम एक सफल मिसाल है। आखिरकार, कल का भारत आज के बच्चों के हाथों ही सजना है।

धन्यवाद।

राष्ट्रीय एकता दिवस

 राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, डेरा 


 एकता दिवस: भारत की अखंडता का प्रतीक

31 अक्टूबर – यह तारीख भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। हर साल इस दिन हम राष्ट्रीय एकता दिवस मनाते हैं, जो हमें देश की एकता, अखंडता और विविधता में एकता की याद दिलाता है। यह दिवस सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर मनाया जाता है, जिन्हें लौह पुरुष के नाम से जाना जाता है। उन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत के 562 रियासतों को एक सूत्र में पिरोकर आधुनिक भारत का निर्माण किया। आइए, इस ब्लॉग में जानें कि राष्ट्रीय एकता दिवस क्यों मनाया जाता है, इसका इतिहास क्या है और आज के समय में इसकी प्रासंगिकता क्या है।


सरदार पटेल: भारत को एक करने वाले Architect

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। वे महात्मा गांधी के निकट सहयोगी थे और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहे। लेकिन उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि भारत के एकीकरण की थी।

1947 में जब भारत आजाद हुआ, तब देश कई रियासतों में बंटा हुआ था। ब्रिटिश शासन के तहत ये रियासतें स्वतंत्र थीं और वे भारत या पाकिस्तान में विलय होने के लिए बाध्य नहीं थीं। कुछ रियासतें जैसे हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर ने विलय में देरी की या विरोध किया।

सरदार पटेल ने कूटनीति, दबाव और आवश्यकता पड़ने पर सैन्य बल का उपयोग करके इन रियासतों को भारत में मिलाया। उदाहरण के लिए:

  • हैदराबाद: निजाम शासन कर रहे थे और वे भारत में विलय नहीं करना चाहते थे। ऑपरेशन पोलो के तहत भारतीय सेना ने 1948 में हैदराबाद को भारत में मिलाया।
  • जूनागढ़: नवाब ने पाकिस्तान में विलय का फैसला किया, लेकिन जनता के विरोध और भारतीय कार्रवाई से यह भारत में शामिल हुआ।

पटेल की दृढ़ता के बिना आज का भारत इतना मजबूत और एकजुट नहीं होता। इसलिए 2014 में भारत सरकार ने उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में घोषित किया।


इस दिवस का मुख्य उद्देश्य :

  1. राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना – जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र के भेदभाव से ऊपर उठकर "भारत पहले" की भावना जगाना।
  2. सरदार पटेल के योगदान को याद करना – युवा पीढ़ी को उनके बलिदान और दूरदर्शिता से परिचित कराना।
  3. विविधता में एकता का संदेश – भारत में 28 राज्य, 8 केंद्र शासित प्रदेश, सैकड़ों भाषाएं और अनेक संस्कृतियां हैं। फिर भी हम एक राष्ट्र हैं।

हर साल इस दिन रन फॉर यूनिटी का आयोजन होता है, जिसमें लाखों लोग हिस्सा लेते हैं। स्कूलों-कॉलेजों में निबंध, भाषण और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।



स्थानीय विद्यालय में राष्ट्रीय एकता दिवस पर शपथ लेते हुए विद्यार्थी



      एक भारत, श्रेष्ठ भारत

   एक भारत, श्रेष्ठ भारत पोस्टर प्रतियोगिता


एक भारत, श्रेष्ठ भारत: डेरा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की एकता रैली ने जगाई देशभक्ति की लौ


        आज, जब पूरा देश सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर राष्ट्रीय एकता दिवस मना रहा है, तो राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा के उत्साही शिक्षक व छात्रों द्वारा "एक भारत, श्रेष्ठ भारत" के सशक्त स्लोगन के साथ एक भव्य रैली निकाली, जो न केवल स्कूल के परिसर को पार कर स्थानीय सड़कों पर गूंजी, बल्कि युवा पीढ़ी के दिलों में एकता की भावना को और मजबूत कर गई। यह रैली न सिर्फ एक आयोजन थी, बल्कि एक संदेश था – विविधता में एकता ही भारत की असली ताकत है।



राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा, ने इस दिवस को यादगार बनाने के लिए कमर कस ली। सुबह 10 बजे स्कूल परिसर में इकट्ठा हुए सैकड़ों छात्रों ने सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी। प्रधानाचार्य श्रीमान छोटेलाल मीना ने शपथ दिलाई – "हम भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता को बनाए रखने का संकल्प लेते हैं।" इसके बाद, "रन फॉर यूनिटी" के तहत रैली का शुभारंभ हुआ।



छात्रों ने हाथों में तिरंगे लिए और जोर-जोर से नारे लगाए: "एक भारत, श्रेष्ठ भारत! एकता में शक्ति है!" रैली स्कूल गेट से शुरू होकर स्थानीय बाजार, गांव की मुख्य सड़कों और वापस स्कूल तक चली। लड़कियां-लड़के, शिक्षक और स्थानीय निवासी – सभी ने इसमें भाग लिया। छोटे-छोटे बच्चे भी कदम मिलाकर चल रहे थे, जो दर्शाता है कि एकता की सीख कितनी गहराई से युवा मन में उतर रही है। रैली के दौरान छात्रों ने पोस्टर भी प्रदर्शित किए, जिन पर लिखा था – "विविधता हमारी शक्ति, एकता हमारा कर्तव्य।"



राष्ट्रीय एकता दिवस एक संकल्प है। सरदार पटेल ने सपना देखा था एक मजबूत, एकजुट भारत का। आज हमारा दायित्व है कि हम उस सपने को साकार करें।

"एकता में ही शक्ति है।" – सरदार वल्लभभाई पटेल


Friday, May 16, 2025

मेगा PTM: विद्यालय में परीक्षा परिणाम घोषित

 


आज, 16 मई 2025, हमारे राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, डेरा रैणी में परीक्षा परिणाम की घोषणा के उपलक्ष्य में एक विशेष आयोजन हुआ - मेगा PTM (पैरेंट-टीचर मीटिंग)। यह दिन न केवल शिक्षकों और अभिभावकों के बीच संवाद का एक शानदार अवसर था, बल्कि बच्चों के समग्र विकास पर चर्चा करने का एक मंच भी बना। मेगा PTM का आयोजन स्कूल के प्रांगण में बड़े उत्साह और व्यवस्थित ढंग से किया गया, जिसमें कई गतिविधियों और चर्चाओं ने इसे और भी यादगार बना दिया।


परीक्षा परिणाम की घोषणा

    परीक्षा परिणाम किसी भी छात्र के शैक्षिक सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। यह न केवल उनकी मेहनत और समर्पण का मूल्यांकन करता है, बल्कि उन्हें अपनी ताकत और कमजोरियों को समझने में भी मदद करता है। विद्यालय द्वारा परिणामों को व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से घोषित किया गया, ताकि अभिभावकों और छात्रों को पूरी जानकारी मिल सके।



मेगा PTM का उद्देश्य

मेगा PTM का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों को उनके बच्चों की शैक्षिक प्रगति, व्यवहार और स्कूल की गतिविधियों से अवगत कराना था। इसके साथ ही, यह शिक्षकों को अभिभावकों के साथ मिलकर बच्चों के लिए बेहतर शैक्षिक और सामाजिक वातावरण बनाने की दिशा में काम करने का अवसर प्रदान करता है। इस आयोजन में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया गया:

  • बच्चों की शैक्षिक प्रगति और कमजोरियों पर चर्चा।

  • सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उनकी भागीदारी।

  • अभिभावकों के सुझावों और फीडबैक को सुनना।

  • स्कूल की नई योजनाओं और पहलों के बारे में जानकारी देना।


आयोजन की झलकियाँ

मेगा PTM की शुरुआत सुबह 9 बजे स्कूल के प्राचार्य के स्वागत भाषण से हुई। उन्होंने अभिभावकों को स्कूल के विजन और मिशन के बारे में बताया और इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके बाद, अभिभावकों को कक्षाओं में आमंत्रित किया गया, जहाँ शिक्षकों ने बच्चों की प्रगति रिपोर्ट साझा की।

1. शैक्षिक प्रदर्शन पर चर्चा

शिक्षकों ने प्रत्येक बच्चे की प्रगति को विस्तार से समझाया। अभिभावकों को बच्चों के टेस्ट परिणाम, प्रोजेक्ट्स, और कक्षा में उनके व्यवहार के बारे में जानकारी दी गई। कई अभिभावकों ने शिक्षकों के साथ व्यक्तिगत रूप से बातचीत की ताकि वे अपने बच्चे की पढ़ाई में और सुधार कैसे ला सकते हैं, इस पर सुझाव ले सकें।

2. वर्कशॉप और सेमिनार

मेगा PTM के दौरान अभिभावकों के लिए कई छोटे-छोटे वर्कशॉप भी आयोजित किए गए। इनमें पेरेंटिंग टिप्स, बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाने के तरीके, और डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा जैसे विषय शामिल थे। ये सत्र अभिभावकों के लिए बहुत उपयोगी साबित हुए।

3. अभिभावकों का फीडबैक

आयोजन के अंत में, अभिभावकों ने स्कूल की व्यवस्था, शिक्षकों की मेहनत और आयोजन की सराहना की। कुछ ने स्कूल में और अधिक खेल सुविधाएँ और डिजिटल लर्निंग संसाधन जोड़ने के सुझाव भी दिए।



मेगा PTM का प्रभाव

मेगा PTM ने न केवल अभिभावकों और शिक्षकों के बीच की दूरी को कम किया, बल्कि बच्चों को भी यह एहसास दिलाया कि उनके माता-पिता और शिक्षक उनके भविष्य के लिए एक साथ काम कर रहे हैं। यह आयोजन स्कूल के समुदाय को और मजबूत करने में सफल रहा। बच्चों के चेहरों पर अपने माता-पिता को स्कूल में देखकर जो खुशी थी, वह इस दिन की सबसे बड़ी उपलब्धि थी।









श्रीमती सीता तिवाड़ी
(प्रधानाचार्य)





  



       


    शिक्षक की सलाह विद्यार्थियों के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश की तरह है, जो उन्हें न केवल शैक्षिक सफलता की ओर ले जाएगी, बल्कि एक जिम्मेदार और सशक्त व्यक्ति बनने में भी मदद करेगी | मेगा PTM एक ऐसा आयोजन था, जिसने शिक्षा को एक सहयोगी और समग्र प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया। यह न केवल अभिभावकों और शिक्षकों के बीच की दूरी को कम करने में सफल रहा, बल्कि छात्रों को यह विश्वास भी दिलाया कि उनका भविष्य सुरक्षित हाथों में है। स्कूल ने इस आयोजन को भव्य और प्रभावी ढंग से आयोजित किया, और भविष्य में इसे और बेहतर बनाने का संकल्प लिया। "

Thursday, May 15, 2025

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा, (रैणी) में विद्यार्थियों के लिए प्रवेश प्रक्रिया


         राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा रैणी, अलवर, राजस्थान के उन प्रमुख सरकारी स्कूलों में से एक है जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए जाना जाता है। यह विद्यालय कक्षा 1 से 12 तक की शिक्षा प्रदान करता है और स्थानीय समुदाय के लिए शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यदि आप अपने बच्चे के लिए इस विद्यालय में प्रवेश लेने की योजना बना रहे हैं, तो यह ब्लॉग आपको प्रवेश प्रक्रिया, पात्रता मानदंड, और आवश्यक दस्तावेजों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करेगा।


    

    

प्रवेश प्रक्रिया का अवलोकन

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा रैणी में प्रवेश प्रक्रिया सरल और पारदर्शी है। यह प्रक्रिया राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार संचालित की जाती है। प्रवेश आमतौर पर शैक्षणिक सत्र की शुरुआत से पहले शुरू होते हैं, और अभिभावकों को समय पर आवेदन जमा करना होता है।



1. पात्रता मानदंड

प्रवेश के लिए पात्रता मानदंड कक्षा के स्तर पर निर्भर करते हैं। सामान्य दिशा-निर्देश निम्नलिखित हैं:

  • कक्षा 1 के लिए: बच्चे की आयु 6 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए (31 मार्च, 2025 तक)।

  • कक्षा 6 और 9 के लिए: पिछले स्कूल से स्थानांतरण प्रमाण पत्र (TC) और पिछले शैक्षणिक वर्ष की मार्कशीट आवश्यक है।

  • कक्षा 11 के लिए: कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। विषय संयोजन (कला, वाणिज्य) के आधार पर न्यूनतम अंक निर्धारित हो सकते हैं।

  • विशेष श्रेणियाँ: एससी, एसटी, ओबीसी, और बीपीएल वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आरक्षण नीतियों के अनुसार प्राथमिकता दी जाती है।

  • स्थानीय निवास: राजस्थान का मूल निवासी होना आवश्यक है, और पिछले शैक्षणिक वर्ष में न्यूनतम 40% अंक प्राप्त किए हों।


2. आवेदन प्रक्रिया

  1. विद्यालय से फॉर्म प्राप्त करें: विद्यालय के कार्यालय से प्रवेश फॉर्म प्राप्त करें। 

  2. फॉर्म भरें: सभी आवश्यक जानकारी, जैसे बच्चे का नाम, जन्म तिथि, अभिभावक का विवरण, और शैक्षणिक रिकॉर्ड, सटीक रूप से भरें।

  3. दस्तावेज संलग्न करें: फॉर्म के साथ सभी आवश्यक दस्तावेजों की फोटोकॉपी संलग्न करें।

  4. जमा करें: भरे हुए फॉर्म को विद्यालय के कार्यालय में निर्धारित तिथि से पहले जमा करें।


3. आवश्यक दस्तावेज

प्रवेश के लिए निम्नलिखित दस्तावेज आवश्यक हैं:

  • बच्चे का आधार कार्ड

  • जन्म प्रमाण पत्र

  • निवास प्रमाण पत्र (जैसे राशन कार्ड या बिजली बिल)

  • पिछले स्कूल की मार्कशीट और स्थानांतरण प्रमाण पत्र (TC)

  • जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)

  • बीपीएल कार्ड (यदि लागू हो)

  • पासपोर्ट साइज फोटो (2-3 प्रतियां)


4. प्रवेश की समय-सीमा

  • आवेदन शुरू होने की तिथि: सामान्यतः अप्रैल-मई में शुरू होती है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए आवेदन 01 मई, 2025 से शुरू हो चुके हैं।

  • आवेदन की अंतिम तिथि: 31 जुलाई, 2025 तक।


5. विद्यालय द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाएँ

        राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा रैणी में निम्नलिखित सुविधाएँ उपलब्ध हैं:

  • निःशुल्क शिक्षा: कक्षा 1 से 12 तक कोई शिक्षण शुल्क नहीं।

  • मिड-डे मील: प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर मुफ्त भोजन।

  • पुस्तकें और यूनिफॉर्म: सरकारी योजनाओं के तहत निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें और यूनिफॉर्म।

  • आधुनिक सुविधाएँ:  स्मार्ट क्लासरूम और कंप्यूटर लैब उपलब्ध |




विद्यालय की विशेषताएं

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, डेरा रैणी में दाखिला लेने के कई लाभ हैं:

  1. गुणवत्तापूर्ण शिक्षा:

    • अनुभवी और योग्य शिक्षकों द्वारा पढ़ाई।

    • राजस्थान बोर्ड के पाठ्यक्रम के अनुसार कला, और वाणिज्य संकाय उपलब्ध।

  2. छात्रवृत्ति योजनाएं:

    • अनुसूचित जाति, जनजाति, और पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति।

    • गार्गी पुरस्कार और मेधावी छात्रों के लिए लैपटॉप वितरण।

  3. आधुनिक सुविधाएं:

    • हवादार कक्षाएं और ग्रीन बोर्ड।

    • स्वच्छ पेयजल और शौचालय सुविधाएं।

    • हरियाली से भरा परिसर।

  4. खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियां:

    • छात्रों के समग्र विकास के लिए खेल प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम।

    • फुटबॉल, क्रिकेट, और अन्य खेलों में भागीदारी।

  5. किफायती शुल्क:

    • सरकारी विद्यालय होने के कारण शुल्क बहुत कम है, जिससे सभी वर्गों के लिए शिक्षा सुलभ है।


हमारा विद्यालय क्यों चुनें ?

    1. शैक्षणिक उत्कृष्टता
    हमारा पाठ्यक्रम Rajasthan Board के नवीनतम दिशानिर्देशों के अनुरूप है, जो छात्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करता है। हमारे अनुभवी शिक्षक प्रत्येक छात्र की प्रगति पर व्यक्तिगत ध्यान देते हैं।
    
    2. समग्र विकास
    हम मानते हैं कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। हमारे विद्यालय में खेल, कला, संगीत, नृत्य और अन्य सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों के लिए विशेष सुविधाएं हैं, जो छात्रों के शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा देती हैं।

    3. आधुनिक सुविधाएं
    हमारे विद्यालय में स्मार्ट क्लासरूम, विज्ञान और कंप्यूटर प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और खेल के मैदान जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह सुनिश्चित करता है कि आपके बच्चे को सीखने का सर्वोत्तम वातावरण मिले।

    4. नैतिक मूल्यों का विकास
    हम अपने छात्रों में अनुशासन, ईमानदारी और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को विकसित करने पर जोर देते हैं, ताकि वे न केवल अच्छे छात्र बल्कि जिम्मेदार नागरिक भी बनें।


 हमारे प्रवेश कार्यालय से संपर्क करें:
        
        फोन: 9461623082
        ईमेल: GSSSDERA@GMAIL.COM    
        पता: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, डेरा (रैणी) अलवर
            
        आज ही अपने बच्चे का भविष्य सुरक्षित करें! हमारे राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय डेरा में प्रवेश लेकर अपने बच्चे को एक ऐसी शिक्षा दें, जो उन्हें जीवन में हर क्षेत्र में सफलता की ओर ले जाए। हम आपके बच्चे का स्वागत करने के लिए उत्साहित हैं!



विद्यार्थियों के लिए समर्पित हमारा स्टाफ (हमारा डेरा परिवार)







वर्ष 2024-25 की कुछ यादें












































अभिभावकों के लिए सुझाव

  • दाखिला प्रक्रिया शुरू होने से पहले सभी दस्तावेज तैयार रखें।

  • विद्यालय के नियमित अपडेट के लिए कार्यालय से संपर्क में रहें।

  • अपने बच्चे को प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए प्रोत्साहित करें, विशेष रूप से उच्च कक्षाओं के लिए।



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